Saturday, October 1, 2022
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यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध से असमंजस में भारत।बड़ा सवाल यह कि आखिर किसका साथ देगा भारत?

इस वक्त रूस और यूक्रेन के बीच भीषण युद्ध छिड़ चुकी है।रूसी सेना ने यूक्रेन के कई शहरों को तबाह करना शुरू कर दिया है।रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव को भी निशाने में ले लिया है।हालात बहुत ही गंभीर हो चुकी है और विश्व भर में इस युद्ध की आहट है।दुनिया के लगभग सभी देशों की नजरें इस वक्त युद्ध पर टिकी हुई है।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साफ शब्दों में कहा कि हालात इतने गंभीर हो चुके थे कि हमारे पास युद्ध के सिवाय और कोई दूसरा विकल्प नहीं था। पुतिन इस वक्त आक्रमक रवैया अपनाए हुए हैं और वे इस समय अपने सभी संसाधनों को युद्ध में इस्तेमाल कर रहे हैं वही दूसरी तरफ यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की अपने बचाव करने में और सक्षम दिखाई दे रहे हैं।जाहिर सी बात है कि रूस के तुलना में यूक्रेन एक कमजोर देश मानी जाती है।यूक्रेन कम संसाधन के कारण रूस के आगे घुटना टेकने के लिए मजबूर हैं।

Russia war

UNO इस मसले को सुलझाने में असक्षम साबित हुई है।

फिलहाल विश्व समुदाय धड़ो में बटी हुई है।अमेरिका यूक्रेन के पक्ष में खड़ी है और पहला तबका वह है जो कि यूक्रेन और अमेरिका के पक्ष में है।इस तबके में शक्तिशाली देश जैसे कि कनाडा,जर्मनी फ्रांस सहित तमाम कई देश शामिल है।दूसरे पक्ष में वह देश है जो कि रूस के साथ कंधे से कंधा मिलाए हुए हैं। रूस के साथ साथ चीन जैसी महाशक्ति खड़ी है।

सभी देश धीरे-धीरे अपना रुख स्पष्ट कर रही है और कही न कही किसी के साथ या किसी के खिलाफ है।इस समय सबसे रोचक प्रश्न यह है कि भारत का रूख किस तरफ है?भारत क्या अपने पुराने मित्र कहे जाने वाले रूस का साथ देगा या यूक्रेन और अमेरिका का!

इस वक्त भारत असमंजस की स्थिति में फंसी हुई है।

भारत के संबंध पिछले एक दशक में अमेरिका से मजबूत हुए हैं।यह तथ्य सभी जानते और मानते भी है।भारत को रूस रूस के खिलाफ भी जाने में नहीं बन रही है क्योंकि रूस के साथ भारत की पुरानी मित्रता बनी हुई है दोनो देश
अच्छे संबंध साझा करते हैं?रूस के साथ हमारी मित्रता बहुत पुरानी है और कई दफा रूस ने हमारी मदद की है।
भारत और रूस के बीच में कई समझौते भी हुए हैं जो कि एक दूसरे की फायदे के लिए हैं।रूस और भारत एक साथ सैन्य अभ्यास करते हुए आपको कई बार दिखे होंगे। भारत की घातक ब्रह्मोस मिसाइल भी रूस के सहयोग से निर्मित हुई थी।भारत के पास वर्तमान में बहुत सारे ऐसे हथियार हैं जो कि रूस की देन है इसलिए भारत रूस के खिलाफ खड़ा नही हो सकता।

भारत अमेरिका के खिलाफ भी जा नहीं सकती क्योंकि भारत के संबंध अमेरिका के साथ पिछले कुछ सालों में अच्छे बने हैं।अमेरिका के साथ भी हमारे बहुत सारे समझौते हुए है।दूसरी बात यह भी है कि भारत और अमेरिका के बीच में बहुत सारे व्यापारिक सौदे भी हुए हैं।
इस समय भारत के लिए स्थिति करो या मरो की बनी हुई है?
संयुक्त राष्ट्र में भारत के तत्कालीन प्रतिनिधि टी.एस. तिरुमूर्ति ने संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन के दौरान भारत की निष्पक्षता की बात रखी।उन्होंने अपने संबोधन के दौरान कहा कि संयुक्त राष्ट्र फिलहाल रूस और यूक्रेन के बीच बढ़ते तनाव को घटाने की कोशिश करें।रूस ने भी उनकी इस बयान की सराहना की है।रूस ने भारत के संतुलित, सैद्धांतिक और स्वतंत्र रुख का स्वागत किया है
मगर वास्तव में युद्ध अपनी भीषण रूप को अपना लेती है तो भारत किसका पक्ष लेती है यह देखने वाली बात होगी।

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